प्रयागराज महाकुंभ के दौरान सुर्खियों में आए ‘आईआईटी बाबा’ के नाम से मशहूर अभय सिंह एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार वजह उनका आध्यात्मिक जीवन नहीं, बल्कि उनका निजी फैसला शादी है।

महाशिवरात्रि पर मंदिर में विवाह, फिर कोर्ट मैरिज
अभय सिंह ने 15 फरवरी को महाशिवरात्रि के अवसर पर अघंजर महादेव मंदिर में पारंपरिक रीति-रिवाज से शादी की। इसके बाद 19 फरवरी को उन्होंने कोर्ट मैरिज भी की।
कौन हैं अभय सिंह की पत्नी?
अभय सिंह की पत्नी का नाम प्रतीका है, जो पेशे से इंजीनियर हैं और बेंगलुरु की रहने वाली हैं। दोनों की मुलाकात करीब एक साल पहले हुई थी और अब वे साथ मिलकर अध्यात्म और सनातन पर काम कर रहे हैं।
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आईआईटी से कनाडा तक, फिर अध्यात्म की राह
अभय सिंह हरियाणा के झज्जर के रहने वाले हैं। उन्होंने आईआईटी बॉम्बे से एरोस्पेस इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। इसके बाद वे कनाडा चले गए, जहां उन्होंने करीब तीन साल तक डिजिटल डिजाइनर के रूप में काम किया। उस दौरान उनका सालाना पैकेज लगभग 35 लाख रुपये था।
फोटोग्राफी और डिजाइन में रुचि के चलते उन्होंने मास्टर्स डिग्री हासिल की और ट्रैवल फोटोग्राफी व फैशन फिल्मों में भी काम किया। इसके अलावा उन्होंने कोचिंग संस्थानों में फिजिक्स पढ़ाया और कई प्रतिष्ठित पत्रिकाओं से जुड़े रहे।
अवसाद के बाद सन्यास, अब नया जीवन अध्याय
बताया जाता है कि अकेलेपन और अवसाद के कारण उन्होंने 2021 में नौकरी छोड़ दी और भारत लौटकर सन्यास का मार्ग अपनाया। अब उन्होंने जीवन का नया अध्याय शुरू करते हुए विवाह का निर्णय लिया है।
परिवार से मुलाकात और मीडिया से बातचीत
हाल ही में अभय सिंह अपनी पत्नी के साथ झज्जर तहसील पहुंचे, जहां वे बैंक खाते की केवाईसी अपडेट करवाने आए थे। इस दौरान वे अपने पिता, वकील कर्ण सिंह के चैंबर भी गए और मीडिया से बातचीत की।
चैंबर के बाहर लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी और कई लोगों ने उनके साथ सेल्फी ली। अभय ने बताया कि वे और उनकी पत्नी एक साझा विजन पर काम कर रहे हैं।
पत्नी प्रतीका ने की तारीफ
प्रतीका ने मीडिया से बातचीत में कहा कि अभय बेहद सरल, ईमानदार और सच्चे इंसान हैं। उन्होंने बताया कि दोनों का उद्देश्य अध्यात्म के क्षेत्र में मिलकर काम करना है।
‘श्री यूनिवर्सिटी’ बनाने की तैयारी
भविष्य की योजनाओं को लेकर अभय और प्रतीिका ने बताया कि वे ‘श्री यूनिवर्सिटी’ की स्थापना पर काम कर रहे हैं। इस संस्थान का उद्देश्य पारंपरिक शिक्षा को आध्यात्मिक साधना के साथ जोड़ना होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रस्तावित ‘सनातन यूनिवर्सिटी’ में शिक्षा के साथ साधना के विभिन्न आयामों को शामिल किया जाएगा, ताकि गुरु, साधक और अध्यात्म से जुड़े लोगों को एक साझा मंच मिल सके।