हाइलाइट्स
- मध्य प्रदेश में टीईटी पर नया आदेश जल्द
- डेढ़ लाख शिक्षकों पर असर संभव
- सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद सख्ती
- सरकार पुनर्विचार याचिका की तैयारी में
- एनसीटीई ने 2010 में किया था टीईटी अनिवार्य
MP TET Update : भोपाल। मध्य प्रदेश में TET (Teacher Eligibility Test) को लेकर स्थिति तेजी से स्पष्ट की जा रही है। स्कूल शिक्षा विभाग अब इस पूरे मामले पर नया और विस्तृत आदेश जारी करने की तैयारी में है, जिसमें यह साफ किया जाएगा कि किन शिक्षकों को यह परीक्षा देनी होगी और किन्हें नियमों के तहत छूट मिल सकती है।
लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि नए आदेश में हर श्रेणी के शिक्षकों की स्थिति स्पष्ट रूप से परिभाषित की जाए, ताकि भविष्य में किसी भी तरह का भ्रम न रहे।
डेढ़ लाख शिक्षकों पर असर, विभाग कर रहा वर्गीकरण
विभाग अब यह तय करने में जुटा है कि पुराने नियमों के तहत नियुक्त शिक्षकों में से किन पर TET लागू होगा और किन मामलों में छूट या राहत दी जा सकती है।
यह फैसला मध्य प्रदेश के लगभग डेढ़ लाख शिक्षकों की सेवा शर्तों और प्रमोशन प्रक्रिया पर सीधा असर डाल सकता है।
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कानूनी प्रक्रिया जारी, सरकार की अगली तैयारी
मामले में सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता से कानूनी राय ली जा रही है। राय मिलने के बाद राज्य सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने की तैयारी भी की जा रही है।
Supreme Court of India के निर्देशों के बाद बढ़ी सख्ती
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में अपने निर्देशों में कहा है कि शिक्षा सेवा में बने रहने और पदोन्नति के लिए TET पास करना आवश्यक हो सकता है।
कोर्ट का यह रुख आने के बाद राज्यों में शिक्षकों की पात्रता को लेकर नियम और सख्त होते दिखाई दे रहे हैं।
National Council for Teacher Education ने 2010 में की थी शुरुआत
TET परीक्षा की शुरुआत वर्ष 2010 में NCTE द्वारा की गई थी। इसका उद्देश्य देशभर में स्कूल शिक्षा की गुणवत्ता को एक समान स्तर पर लाना था।
इसके तहत कक्षा 1 से 8 तक शिक्षक बनने के लिए इस पात्रता परीक्षा को अनिवार्य किया गया।
क्या है TET और क्यों जरूरी है?
TET यानी Teacher Eligibility Test एक पात्रता परीक्षा है, जो यह तय करती है कि कोई अभ्यर्थी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ाने के लिए योग्य है या नहीं।
इसका उद्देश्य सिर्फ नियुक्ति नहीं, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता को मजबूत करना भी है।
पुराने शिक्षकों को लेकर सबसे बड़ा सवाल
सबसे बड़ा मुद्दा यही है कि पुराने नियुक्त शिक्षक इस नियम के दायरे में आते हैं या नहीं।
इसी पर कानूनी राय और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आधार पर अब अंतिम स्थिति स्पष्ट की जा रही है।
शिक्षक संगठनों में अलग-अलग राय
इस फैसले को लेकर शिक्षक संगठनों में मतभेद भी सामने आए हैं। कुछ संगठनों का कहना है कि प्रभावित पक्षों से पूरी तरह चर्चा नहीं हुई, जबकि कुछ इसे नियमों के अनुरूप सुधारात्मक कदम मान रहे हैं।
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सरकार की तैयारी, प्रशिक्षण और समाधान दोनों पर फोकस
विभाग की योजना है कि यदि TET लागू होता है, तो शिक्षकों के लिए ब्लॉक और तहसील स्तर पर प्रशिक्षण और मार्गदर्शन कार्यक्रम भी चलाए जाएं।
इसके साथ ही वेतनवृद्धि और समयमान वेतनमान से जुड़े लंबित मामलों को भी तेजी से निपटाने के निर्देश दिए गए हैं।