छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के नवा रायपुर स्थित पुरखौती मुक्तांगन परिसर में बसंत पंचमी यानी 23 जनवरी से रायपुर साहित्य उत्सव 2026 की शानदार शुरुआत हुई। उत्सव में साहित्यकारों, लेखकों और बुद्धिजीवियों का जमावड़ा देखने को मिल रहा है। बतादेंकि 23 जनवरी को उद्घाटन समारोह विनोद कुमार शुक्ल मंडप में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश मुख्य अतिथि रहे, जबकि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की.

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपर में प्रदेश की गौरवगाशी धरती पर देश के कोने कोने से 120 से ज्यादा साहित्यकार, लेखकों और बुद्धिजीवियों का जमावड़ा देखने को मिल रहा है…हर तरफ संस्कृति और उससे जुड़ी विरासत देखने को मिल रही है दरअसल छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के नवा रायपुर स्थित पुरखौती मुक्तांगन परिसर में बसंत पंचमी यानी 23 जनवरी से रायपुर साहित्य उत्सव 2026 का शुभारंभ हो चुका है यह उत्सव न केवल राज्य की समृद्ध साहित्य परंपर का उत्सव है बल्कि देश मानचित्र पर सशक्त रूप से स्थापित करने में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है…जहां देश विदेश के साहित्यकार,लेखक,कलाकार शामिल हो रहे हैं बतादेंकि उद्घाटन समारोह विनोद कुमार शुक्ल मंडप में आयोजित जा रहा है । कार्यक्रम में राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश नारायण सिंह मुख्य अतिथि रहे , जबकि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की..समारोह का आयोजन विनोद कुमार शुक्ल मंडप में हो रहा है…इस कार्यक्रम के दौरान उपमुख्यमंत्री अरुण साव, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा की कुलपति डॉ. कुमुद शर्मा, अभिनेता मनोज जोशी मौजूद रहे…
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इस दौरान छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि रायपुर साहित्य उत्सव 2026 साहित्य का महाकुंभ है। इसमें देश के अलग-अलग राज्यों से आए 120 से अधिक साहित्यकार भाग ले रहे हैं। तीन दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में कुल 42 सत्रों के माध्यम से सामाजिक, सांस्कृतिक और समकालीन विषयों पर चर्चा होगी। उन्होंने कहा कि यह आयोजन गणतंत्र के अमृतकाल और छत्तीसगढ़ राज्य के रजत जयंती वर्ष की भावना को दर्शाता है…वहीं उप सभापति हरिवंश ने कहा कि एक पुस्तक और एक लेखक भी दुनिया को बदलने की शक्ति रखते हैं। उन्होंने राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की पंक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि साहित्य समाज को दिशा देता है
इस मौके पर उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि माता शबरी, माता कौशल्या और छत्तीसगढ़ महतारी की यह धरती भगवान श्रीराम का ननिहाल है। ऐसे पावन स्थल पर, छत्तीसगढ़ राज्य के रजत जयंती वर्ष और बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर रायपुर साहित्य उत्सव का आयोजन होना प्रदेश के लिए गौरव की बात है
बतादेंकि यह तीन दिवसीय आयोजन छत्तीसगढ़ की समृद्धि साहित्य संस्कृति और बौद्धिक परंपरा को प्रदर्शित करेंगा। इस आयोजन में देश प्रदेश के ख्याति प्राप्त साहित्यकार अपने विचारों और रचनाओं का मंचन करेंगें। इस आयोजन में साहित्य, कला और संस्कृति का विराट संगम देखने को मिलेगा। इस साहित्यक आयोजन में
120 से अधिक ख्याति प्राप्त साहित्यकार इस आयोजन में अपनी सहभागिता दें रहे है।
वही साहित्यक सत्र में 42 सत्रों में विचार, विमर्श और संवाद किया जाएगा। साहित्यिक महोत्सव केवल भाषणों तक सीमित नहीं रहेगा यहां हर आयु वर्ग को उनके उनके विचारों को पटल पर रखने का एक मंच दिया गया है। इस साहित्यिक महोत्सव में राष्ट्रीय पुस्तक मेला का आयोजन, युवाओं के लिए ओपन माइक और टैलेंट जोन और कला प्रदर्शनी रखी गईं है…
इस कार्यक्रम में राष्ट्र सेवा के सौ वर्ष, छत्तीसगढ़ के लोक गीत, धार्मिक फिल्में और टीवी धारावाहिक, भारत का बौद्धिक विमर्श, राष्ट्रीय मीडिया में बहस के मुद्दे, नाट्यशास्त्र और कला परंपरा,पर्यटन, और संविधान और भारतीय मूल्य जैसे विषयों पर गहन चर्चा होगी…अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृति में काव्य पाठ का आयोजन किया जाएगा…साथ ही छत्तीसगढ़ी काव्य पाठ का आयोजन भी किया जाएगा। कहना गलत नहीं होगा कि रायपुर साहित्य उत्सव 2026 का यह शुभारंभ साहित्यिक संवाद, विचारों के आदान-प्रदान और सांस्कृतिक चेतना के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हो रहा है।
