हाइलाइट्स
- 1 जनवरी से 8 फरवरी 2026 के बीच भोपाल नगर निगम को लगभग 8,000 शिकायतें मिलीं।
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लगभग 42% शिकायतें अभी तक लंबित हैं।
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सफाई और सीवेज बनी सबसे बड़ी समस्या।
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प्रदेश के सभी बड़े शहरों में भोपाल नंबर वन शिकायतों की संख्या में।
BHOPAL NEWS : भोपाल। भोपाल नगर निगम की व्यवस्थाएं लगातार सवालों के घेरे में हैं। 1 जनवरी 2026 से 8 फरवरी 2026 के बीच नगर निगम को कुल 7969 शिकायतें मिलीं। यह संख्या प्रदेश के सभी बड़े शहरों में सबसे ज्यादा है। इन शिकायतों में से लगभग 42 प्रतिशत अभी तक निपटाई नहीं गई, जिससे आम जनता की परेशानियां लगातार बढ़ रही हैं।
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किस तरह की शिकायतें सबसे ज्यादा हैं?
नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार, सबसे ज्यादा शिकायतें सफाई, सीवेज, पानी, स्ट्रीट लाइट, अतिक्रमण, बिल्डिंग परमिशन और आवारा कुत्तों को लेकर दर्ज हुई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि पुराने इलाकों में सीवेज लाइन चोक होना, पाइपलाइन लीकेज और पुरानी केबलिंग के कारण स्ट्रीट लाइट खराब रहना बड़ी वजह हैं।

भोपाल अन्य शहरों की तुलना में सबसे आगे
प्रदेश के अन्य बड़े शहरों की तुलना में भोपाल न केवल शिकायतों की संख्या में सबसे ऊपर है, बल्कि स्ट्रीट डॉग और सफाई को लेकर असंतोष भी सबसे ज्यादा देखा गया है। ग्वालियर में 6975, इंदौर में 6602, जबलपुर में 4592 और उज्जैन में 2218 शिकायतें दर्ज हुईं। भोपाल में इन शिकायतों का सिर्फ 58 प्रतिशत ही समाधान हुआ है, जबकि ग्वालियर और उज्जैन में यह क्रमशः 44 और 39 प्रतिशत है।
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शिकायतें क्यों बढ़ रही हैं?
भोपाल में शिकायतों की संख्या बढ़ने के पीछे कई कारण हैं। सफाई और सीवेज सिस्टम पर लगातार दबाव पड़ रहा है। पुराने इलाकों में जर्जर इंफ्रास्ट्रक्चर और स्ट्रीट लाइट की पुरानी केबलिंग समस्याओं को बढ़ा रही हैं। साथ ही शिकायतों के निस्तारण की धीमी प्रक्रिया और जिम्मेदार एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी भी एक बड़ी वजह है।

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39 दिनों में भोपाल नगर निगम को करीब 8 हजार शिकायतें मिलीं। इनमें से लगभग 42 प्रतिशत का अब तक समाधान नहीं हुआ है। सफाई और सीवेज सबसे बड़ी समस्या बनी हुई हैं। प्रदेश के सभी बड़े शहरों में भोपाल शिकायतों की संख्या के मामले में नंबर वन है।



