केंद्रीय बजट 2026 को लेकर देश का वित्तीय सेवा क्षेत्र सरकार से बड़ी उम्मीदें जोड़ कर बैठा है। 1 फरवरी को पेश होने वाले इस बजट से पहले बीमा कंपनियों, NBFC, डिजिटल लेंडर्स और MSME सेक्टर ने अपनी पांच जरूरी मांगें सरकार के सामने रखी हैं। उद्योग का यह मानना है कि इन मांगों पर ध्यान देने से देश की आर्थिक सुरक्षा व्यवस्था और ज्यादा मजबूत हो सकती है।

सबसे पहली और जरूरी मांग पेंशन और एन्युटी पर टैक्स में समानता रखने पर हुई है। फिलहाल बीमा एन्युटी से मिलने वाली पूरी रकम पर टैक्स लगाया जाता है, जबकि निवेशक अपने मूलधन पर पहले ही टैक्स दे चुके होते हैं। इसके मुकाबले NPS में अतिरिक्त टैक्स छूट मिलती है। बीमा कंपनियां चाहती हैं कि एन्युटी में सिर्फ रिटर्न वाले हिस्से पर ही टैक्स लगे और बीमा आधारित पेंशन योजनाओं को भी NPS जैसी टैक्स छूट दी जाए।
दूसरी बड़ी मांग है कि जलवायु जोखिम बीमा को मजबूत करने से जुड़ी है। देश में बाढ़, हीटवेव और चरम मौसम की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में पैरामीट्रिक बीमा को बढ़ावा देने की जरूरत बताई जा रही है, ताकि नुकसान का आकलन जल्दी हो सके और लोगों को समय पर मुआवजा मिल सके। इसके लिए बेहतर क्लाइमेट डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर और पब्लिक-प्राइवेट रिस्क पूल तैयार करने की मांग की गई है।
तीसरा मुद्दा डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर से संबंधित है। बीमा उद्योग एक यूनिफाइड इंश्योरेंस डेटा एक्सचेंज चाहता है, जिससे फ्रॉड के मामलों में कमी आए, प्रीमियम तय करना आसान हो और उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़े। मजबूत डेटा सिस्टम से बीमा सेक्टर की पारदर्शिता भी बेहतर हो सकती है।
चौथी मांग कंपोजिट लाइसेंसिंग को लेकर है। उद्योग चाहता है कि एक ही कंपनी को लाइफ और नॉन-लाइफ दोनों तरह के बीमा उत्पाद देने की अनुमति मिले। इससे कंपनियों की लागत घटेगी और ग्राहकों को एक ही जगह पर बेहतर और सस्ते बीमा विकल्प मिल सकेंगे।
पांचवां और आखिरी मुद्दा माइक्रो-इंश्योरेंस और MSME लेंडिंग से जुड़ा है। कम प्रीमियम वाले बीमा प्रोडक्ट्स, आसान नियम और NBFC को बेहतर रीफाइनेंस सपोर्ट देने की मांग की जा रही है, ताकि छोटे कारोबारियों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सके।
कुल मिलाकर, बजट 2026 से यह उम्मीद की जा रही है कि सरकार बीमा और लोन को सिर्फ वित्तीय उत्पाद के रूप में नहीं, बल्कि हर भारतीय परिवार की आर्थिक सुरक्षा की मजबूत नींव के तौर पर देखेगी।