Supplementary Exam MP – local samachar 24 https://localsamachar24.com जो सही बस वही Wed, 15 Apr 2026 06:31:38 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.4 https://localsamachar24.com/wp-content/uploads/2026/01/cropped-logo-LOCAL-SAMACHAR-32x32.png Supplementary Exam MP – local samachar 24 https://localsamachar24.com 32 32 MP Board Result 2026 : एमपी बोर्ड रिजल्ट 2026, बेटियों का दबदबा, 16 साल का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन, असफल छात्रों को मिलेगा दूसरा मौका https://localsamachar24.com/mp-board-result-2026-%e0%a4%8f%e0%a4%ae%e0%a4%aa%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a5%8b%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a1-%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%9c%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%9f-2026-%e0%a4%ac%e0%a5%87%e0%a4%9f%e0%a4%bf/ https://localsamachar24.com/mp-board-result-2026-%e0%a4%8f%e0%a4%ae%e0%a4%aa%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a5%8b%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a1-%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%9c%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%9f-2026-%e0%a4%ac%e0%a5%87%e0%a4%9f%e0%a4%bf/#respond Wed, 15 Apr 2026 06:28:22 +0000 https://localsamachar24.com/?p=1181 हाइलाइट्स

  • एमपी बोर्ड में 16 वर्षों का सर्वश्रेष्ठ परिणाम दर्ज
  • 10वीं और 12वीं दोनों में छात्राओं ने लड़कों को पीछे छोड़ा
  • Mohan Yadav ने छात्रों को बधाई, बेहतर व्यवस्था का दावा
  • 5 मई के बाद सेकेंड एग्जाम, फेल छात्रों को नहीं होगी चिंता

MP Board Result 2026 : भोपाल। मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल के इस वर्ष के परीक्षा परिणाम कई मायनों में खास रहे। यह परिणाम सिर्फ पास प्रतिशत या टॉपर्स की सूची तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य की शिक्षा व्यवस्था में हो रहे बदलाव, पारदर्शिता और अवसरों के विस्तार की भी कहानी बयां करता है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने सभी विद्यार्थियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।

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16 वर्षों में सबसे बेहतर परिणाम

राज्य सरकार के अनुसार इस वर्ष का परीक्षा परिणाम पिछले 16 वर्षों में सबसे बेहतर माना जा रहा है। परीक्षा प्रक्रिया को इस बार अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने के लिए विशेष प्रयास किए गए। परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरों की निगरानी और जैमर की व्यवस्था की गई, जिससे नकल की घटनाओं में कमी आई।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि यह परिणाम विद्यार्थियों की मेहनत, शिक्षकों के मार्गदर्शन और परिवार के सहयोग का संयुक्त परिणाम है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि परीक्षा के बाद निर्धारित समय सीमा के भीतर परिणाम जारी करने का लक्ष्य रखा गया था, जिसे पूरा किया गया।

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10वीं का परिणाम: छात्राओं का बेहतर प्रदर्शन

कक्षा 10वीं के परीक्षा परिणाम में कुल 73.42 प्रतिशत विद्यार्थी सफल घोषित किए गए। इस परीक्षा में 7 लाख से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया था।

छात्राओं ने इस बार भी बेहतर प्रदर्शन करते हुए छात्रों को पीछे छोड़ दिया। सरकारी विद्यालयों का परिणाम निजी विद्यालयों की तुलना में अधिक रहा, जो शिक्षा व्यवस्था में हो रहे सुधारों का संकेत देता है। सरकारी विद्यालयों का परिणाम लगभग 76 प्रतिशत रहा, जबकि निजी विद्यालयों का परिणाम करीब 68 प्रतिशत दर्ज किया गया।

पन्ना जिले की छात्रा प्रतिभा सिंह सोलंकी ने 500 में से 499 अंक प्राप्त कर प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया। यह उपलब्धि न केवल उनके लिए बल्कि पूरे जिले के लिए गौरव का विषय बनी।

मेरिट सूची में कुल 378 विद्यार्थियों ने स्थान प्राप्त किया, जिसमें बड़ी संख्या में छात्राएं शामिल हैं।

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जिलों का प्रदर्शन: अनूपपुर और अलीराजपुर आगे

जिला स्तर पर देखें तो अनूपपुर ने 98 प्रतिशत परिणाम के साथ पहला स्थान हासिल किया। अलीराजपुर 92 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर रहा।

इन जिलों का प्रदर्शन विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि ये जनजातीय क्षेत्र माने जाते हैं। यहां के विद्यार्थियों का बेहतर प्रदर्शन यह दर्शाता है कि शिक्षा अब दूरदराज के क्षेत्रों तक प्रभावी रूप से पहुंच रही है।

12वीं का परिणाम: निरंतर प्रगति का संकेत

कक्षा 12वीं में इस वर्ष 76.01 प्रतिशत विद्यार्थी सफल हुए। यहां भी छात्राओं ने बेहतर प्रदर्शन किया और 79 प्रतिशत से अधिक छात्राएं पास हुईं।

सरकारी विद्यालयों का परिणाम 80.43 प्रतिशत रहा, जो निजी विद्यालयों की तुलना में अधिक है। यह आंकड़ा सरकारी शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता में सुधार को दर्शाता है।

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भोपाल की छात्रा खुशी राय और नीलबड़ की चांदनी विश्वकर्मा ने शीर्ष स्थान हासिल किया। इन दोनों छात्राओं की सफलता ने राजधानी को गौरवान्वित किया है।

मेरिट सूची में कुल 221 विद्यार्थियों ने स्थान प्राप्त किया।

झाबुआ और अनूपपुर का बेहतर प्रदर्शन

12वीं के परिणाम में झाबुआ जिले ने 93.23 प्रतिशत के साथ पहला स्थान प्राप्त किया, जबकि अनूपपुर दूसरे स्थान पर रहा।

यह तथ्य महत्वपूर्ण है कि जनजातीय क्षेत्रों के जिले लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं, जो शिक्षा के प्रसार और जागरूकता में वृद्धि का संकेत है।

बेटियों की सफलता: बदलते सामाजिक संकेत

इस वर्ष के परीक्षा परिणाम का सबसे उल्लेखनीय पहलू यह रहा कि छात्राओं ने न केवल पास प्रतिशत में बल्कि मेरिट सूची में भी अपना दबदबा कायम रखा।

यह बदलते सामाजिक दृष्टिकोण और शिक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता को दर्शाता है। परिवारों द्वारा बेटियों की शिक्षा पर दिया जा रहा ध्यान अब स्पष्ट रूप से परिणामों में दिखाई दे रहा है।

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असफल छात्रों के लिए दूसरा अवसर

स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि मध्यप्रदेश उन चुनिंदा राज्यों में शामिल है, जहां असफल विद्यार्थियों को दोबारा परीक्षा देने का अवसर प्रदान किया जाता है।

उन्होंने बताया कि 5 मई के बाद सेकेंड एग्जाम की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। जो विद्यार्थी इस बार सफल नहीं हो पाए हैं, उन्हें चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। वे दोबारा परीक्षा देकर अपने परिणाम में सुधार कर सकते हैं।

यह व्यवस्था विशेष रूप से उन विद्यार्थियों के लिए राहत प्रदान करती है, जो किसी कारणवश अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाए।

परीक्षा केवल विद्यार्थियों की नहीं, पूरे परिवार की होती है

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने वक्तव्य में एक महत्वपूर्ण बात कही कि परीक्षा केवल विद्यार्थियों की नहीं होती, बल्कि इसमें पूरा परिवार शामिल होता है।

तैयारी के दौरान परिवार का सहयोग, मानसिक समर्थन और प्रोत्साहन विद्यार्थियों को बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करता है। इसलिए परिणाम चाहे जैसा भी हो, विद्यार्थियों को निराश होने की बजाय आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए।

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नकल पर नियंत्रण और पारदर्शिता पर जोर

इस वर्ष परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए कई तकनीकी उपाय किए गए। परीक्षा केंद्रों पर निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया गया, जिससे नकल के मामलों में कमी आई।

सरकार का मानना है कि निष्पक्ष परीक्षा ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की आधारशिला होती है, और इस दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

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