क्या कोई व्यक्ति जिंदा होते हुए भी पोस्टमॉर्टम टेबल तक पहुंच सकता है? मध्य प्रदेश के गुना से सामने आई एक हैरान करने वाली घटना ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक युवक ने दावा किया है कि उसे जिंदा होते हुए मृत समझ लिया गया और पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया।
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क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, गुना के एक युवक ने मानसिक प्रताड़ना और प्रेम प्रसंग के चलते सल्फास खा लिया था। इसके बाद उसे अचेत अवस्था में जिला अस्पताल लाया गया। बताया जा रहा है कि जिस महिला के घर पर उसने यह कदम उठाया, वही उसे अस्पताल लेकर पहुंची थी।
युवक का चौंकाने वाला दावा
युवक का आरोप है कि अस्पताल में उसे मृत घोषित कर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया। उसका कहना है कि जब उसे होश आया, तब वह खुद को पोस्टमॉर्टम रूम में पाया, जहां चीर-फाड़ की तैयारी चल रही थी।
युवक के अनुसार, अगर उसे समय पर होश नहीं आता, तो उसकी जान जा सकती थी। होश में आते ही वह बिना कपड़ों के ही वहां से भाग निकला।
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घटना में आया नया ट्विस्ट
इसी दिन अस्पताल में युवक के परिजन भी पहुंच गए और जमकर हंगामा हुआ। इस दौरान महिला के साथ मारपीट का एक वीडियो भी सामने आया, जिसमें वही युवक उसे बचाते हुए दिखाई दे रहा है।
यहीं से मामले में सवाल खड़े हो गए—
अगर युवक को मृत मानकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया था, तो वह उसी समय परिजनों के बीच कैसे मौजूद था?
वीडियो जारी कर लगाए आरोप
18 मार्च को युवक ने एक वीडियो जारी कर अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए। उसने कहा कि उसे जिंदा होते हुए भी पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया था।
अस्पताल प्रशासन का पक्ष
अस्पताल प्रबंधन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।
CMHO का कहना है कि पोस्टमॉर्टम एक तय प्रक्रिया के तहत होता है—
- पुलिस द्वारा शव भेजा जाता है
- आवश्यक दस्तावेज भरे जाते हैं
- इसके बाद ही डॉक्टर पोस्टमॉर्टम करते हैं
प्रशासन के मुताबिक, इस मामले में न तो कोई आधिकारिक दस्तावेज सामने आया है और न ही किसी डॉक्टर का नाम, जिससे आरोपों की पुष्टि हो सके।
उठ रहे हैं कई बड़े सवाल
- क्या अस्पताल में इतनी बड़ी लापरवाही हुई?
- क्या युवक का दावा सच है या यह गलतफहमी है?
- अगर सच है, तो यह सिस्टम की बेहद गंभीर चूक है
- और अगर गलत है, तो असली कहानी क्या है?
निष्पक्ष जांच की मांग
फिलहाल, यह मामला संदेह और सवालों के घेरे में है। सच्चाई क्या है, यह केवल निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आ पाएगा।



