Thursday, March 19, 2026
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मथुरा में बसंत पंचमी से शुरू हुआ होली उत्सव, 40 दिनों तक चलेगा रंगों का त्योहार

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कान्हा की नगरी मथुरा में 23 जनवरी यानी बसंत पंचमी के पावन पर्व के साथ ही विश्व प्रसिद्ध ‘ब्रज की होली’ का विधिवत आगाज हो गया है. वृंदावन के विश्व विख्यात ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में आज सुबह से ही अबीर-गुलाल उड़ना शुरू हो गया, जिससे पूरा मंदिर परिसर रंगीन छटा में सराबोर हो गया. ब्रज की परंपरा के अनुसार, बसंत पंचमी के दिन ‘होली का ढांडा’ गाड़ने के साथ ही 40 दिवसीय होली महोत्सव की शुरुआत हो जाती है.

Barsana Holi 2026
Barsana Holi 2026

25 फरवरी से बरसाना में लठमार होली

 

वहीं आपको ये भी बतादेंकि बरसाना की लट्ठमार होली रंगीली गली में होली खेली जाती है। इसे राधा-कृष्ण प्रेम का प्रतीक स्थल माना जाता है। यह गली हर साल हजारों श्रद्धालुओं और पर्यटकों से भर जाती है। लट्ठमार होली से एक दिन पहले “लड्डू होली” मनाई जाती है, जिसमें लड्डू फेंककर होली खेली जाती है। बरसाना में देश-विदेश से होली देखने के लिए पहुंचते हैं..बतादेंकि इस साल लट्ठमार होली 26 फरवरी को मनाई जाएगी…

 

रंगीली गली में ही क्यों मनाते हैं लठमार होली ?

Barsana Holi
Lathmar-Holi-of-Barsana

बरसाना में होली का त्योहार सिर्फ रंगों का उत्सव नहीं है, बल्कि प्रेम और उत्साह का प्रतीक है, जिसमें मीठी गालियों के साथ वृंदावन और नंदगांव के हुरियारों का स्वागत किया जाता है. वैसे तो पूरे बरसाना में ही होली का रंग उड़ता है, लेकिन बरसाना की ‘रंगीली गली’ में अलग ही आनंद वाली होली खेली जाती है. ये गली न केवल एक मार्ग है, बल्कि ब्रज की सदियों पुरानी संस्कृति और लट्ठमार होली का जीवंत केंद्र है.धार्मिक मान्यताओं और प्राचीन कथाओं के अनुसार द्वापर युग में भगवान कृष्ण अपने सखाओं के साथ इसी गली से होते हुए राधा रानी और गोपियों से होली खेलने जाते थे. करीब 100 मीटर लंबी इस गली का इतिहास सदियों पुराना है और इसे प्रेम और समर्पण का प्रतीक माना जाता है. इसी गली में श्रीकृष्ण राधारानी के पीछे भागते थे और रंग लगाते वक्त श्रीजी के सामने समर्पण भी करते हैं. यही वजह है कि रंगीली गली में होली का विशेष महत्व है 

 

आखिर कहां तक फैला है ब्रज

Barsana Holi 2026
Barsana Holi 2026

ब्रज का एरिया मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश के मथुरा, वृंदावन, गोवर्धन, गोकुल, बरसाना, नंदगांव और इसके आसपास के स्थानों में फैला हुआ है.जहां के कण कण में राधा-कृष्ण का प्रेम नजर आता है इसलिए तो ब्रज का फाल्गुन का त्योहार दुनियाभर में प्रसिद्ध है

 

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