MP LPG Rate: मध्य प्रदेश में करीब 11 महीने बाद घरेलू LPG गैस सिलेंडर की कीमत बढ़ा दी गई है। सिलेंडर के दाम में 60 रुपए की बढ़ोतरी की गई है, जिससे अब प्रदेश के ज्यादातर जिलों में गैस 900 रुपए से ज्यादा कीमत पर मिलेगी।

बड़े शहरों में नए रेट
- नई कीमत लागू होने के बाद प्रदेश के प्रमुख शहरों में गैस सिलेंडर के दाम इस तरह हैं:
- भोपाल: 918 रुपए
- इंदौर: 941 रुपए
- ग्वालियर: 996 रुपए
- जबलपुर: 919 रुपए
- उज्जैन: 972 रुपए
इनमें ग्वालियर में सबसे ज्यादा कीमत देखने को मिल रही है।
नर्मदापुरम में सबसे महंगी गैस
प्रदेश में सबसे महंगा सिलेंडर नर्मदापुरम में 1035 रुपए में मिलेगा। इसके अलावा मुरैना, भिंड, निवाड़ी, टीकमगढ़, झाबुआ, दतिया, श्योपुर, शिवपुरी और रतलाम में भी गैस की कीमत लगभग 1000 रुपए के करीब पहुंच गई है।
शाजापुर और सीहोर में सबसे कम कीमत
प्रदेश में शाजापुर और सीहोर ऐसे जिले हैं, जहां गैस सिलेंडर सबसे कम कीमत पर मिलेगा। यहां सिलेंडर की कीमत करीब 918.50 रुपए रहेगी। इसके अलावा सिवनी, सागर, विदिशा, दमोह, रायसेन, पन्ना, उमरिया और सीधी जैसे जिलों में भी कीमत अपेक्षाकृत कम है।
इससे पहले कब बढ़े थे दाम
इससे पहले 8 अप्रैल 2025 को गैस सिलेंडर के दाम बढ़ाए गए थे। वहीं 8 मार्च 2024 को महिला दिवस के मौके पर केंद्र सरकार ने 100 रुपए की कटौती भी की थी।
कॉमर्शियल गैस भी हुई थी महंगी
मार्च महीने की शुरुआत में कॉमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम भी करीब 31 रुपए तक बढ़ाए गए थे। अब घरेलू गैस सिलेंडर के रेट बढ़ने से आम लोगों की जेब पर असर पड़ना तय माना जा रहा है।
गैस की सप्लाई बनाए रखने के लिए आदेश
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण गैस सप्लाई प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। इसे देखते हुए केंद्र सरकार ने देश की ऑयल रिफाइनरी कंपनियों को LPG उत्पादन बढ़ाने का निर्देश दिया है।
सरकार ने कहा है कि रिफाइनरियां प्रोपेन और ब्यूटेन का इस्तेमाल मुख्य रूप से LPG गैस बनाने में करें, ताकि उपभोक्ताओं को गैस की सप्लाई में कोई कमी न हो।
गैस सिलेंडर की कीमत कैसे तय होती है?
LPG की कीमत तेल कंपनियां हर महीने अंतरराष्ट्रीय बाजार के दाम, डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत और अन्य लागतों के आधार पर तय करती हैं। इसके बाद टैक्स, ट्रांसपोर्ट और डीलर कमीशन जोड़कर अंतिम कीमत तय होती है।
एसेंशियल कमोडिटी एक्ट क्या है?
सरकार ने LPG उत्पादन बढ़ाने का आदेश एसेंशियल कमोडिटी एक्ट 1955 के तहत दिया है। इस कानून के जरिए सरकार जरूरी वस्तुओं की सप्लाई और कीमतों को नियंत्रित करने के लिए विशेष निर्देश जारी कर सकती है।


