सेशेल्स का विशाल कछुआ जोनाथन दुनिया का सबसे बुजुर्ग जीवित ज़मीनी जानवर माना जाता है. उसकी उम्र 192 साल से ज्यादा बताई जाती है. वो सेंट हेलेना द्वीप पर रहता है और 19वीं सदी से अब तक का सफर देख चुका है. हालांकि उसकी आंखों की रोशनी और सूंघने की शक्ति कमजोर हो चुकी है, लेकिन विशेषज्ञों की देखरेख में वो आज भी स्वस्थ जीवन जी रहा है…बतादेंकि सेंट हेलेना द्वीप पर स्थित प्लांटेशन हाउस आज भी जॉनथन का घर है। यह वही जगह है जो आईलैंड के गवर्नर का आधिकारिक घर भी है। जॉनथन यहां कई गवर्नरों का काम देख चुका है। बतादेंकि वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया कि उसका जन्म लगभग 1832 के आसपास हुआ होगा। जॉनथन को आज लोग केवल एक कछुआ नहीं, बल्कि जीता-जागता इतिहास कहते हैं। उसने दुनिया को बदलते देखा है, इंसानों की पीढ़ियां आते-जाते देखी हैं और समय की रफ्तार को अपनी धीमी चाल से मात भी दी है। वैसे जॉनथन सेशेल्स जायंट टॉरटॉइज प्रजाति का कछुआ है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में अलडाब्राचेलिस गिगैन्टिया होलोलिसा कहा जाता है। इस प्रजाति के कछुए आम तौर पर 150 साल तक जिंदा रह सकते हैं, लेकिन जॉनथन ने इस उम्र को भी बहुत पीछे छोड़ दिया है

आखिर कछुए इतना क्यों जीते हैं
जॉनथन आज 192 साल का हो चला है लेकिन कछुओं के ज्यादा जीने का कारण उनका धीमा चयापचय (metabolism), मजबूत डीएनए मरम्मत प्रणाली, टेलोमियर (telomeres) का धीरे-धीरे छोटा होना, कैंसर से बचाव करने वाले जीन और उनके कठोर खोल (shell) से मिलने वाला सुरक्षात्मक लाभ है, जो उन्हें पर्यावरणीय खतरों और शिकारियों से बचाता है, जिससे कोशिकाओं को क्षति कम पहुँचती है और वे 100-150 साल या उससे भी ज़्यादा जीते हैं
कछुए में कैंसर प्रतिरोधी क्षमता होती है
आज इंसान में कैंसर जैसी गंभीर बीमारी होना आम बात है लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि कुछ कछुओं में ऐसे जीन होते हैं जो कैंसर को दबाते हैं और कोशिकाओं को नुकसान से बचाते हैं, जिससे वे लंबे समय तक स्वस्थ रहते हैं।
इतिहास में दर्ज सबसे लंबे समय तक जीवित रहने वाले कछुए का नाम ‘अलडाबरा टॉरटॉयज’ था, जो साल 2006 में कोलकत्ता के चिड़ियाघर में रहते हुए मर गया था..उसकी उम्र करीब 200 साल बताई जातीहै जबकि इस प्रजाति के कछुए करीब 256 साल तक जिंदा रहते हैं और 150 साल के जिंदा रहने के बाद ही मरते हैं…यह विशालकाय कछुआ सेशेल्स आइलैंड में पाया गया था और इस पर कई वैज्ञानिक रिसर्च भी की गई थीं.
