Crude Oil Price: कच्चे तेल की कीमतों में इस हफ्ते तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है। कारोबार के दौरान कच्चे तेल की कीमत 108.77 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जो करीब 4 महीने का सबसे ऊंचा स्तर है। इस हफ्ते तेल की कीमत में करीब 13 फीसदी की तेजी आई है।

तेल की कीमतों में इस बढ़ोतरी की बड़ी वजह ईरान युद्ध के कारण तेल सप्लाई पर बढ़ता दबाव है। होर्मुज स्ट्रेट और लाल सागर जैसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों से तेल की आवाजाही प्रभावित हुई है। इसके अलावा सऊदी अरब में कच्चे तेल का उत्पादन भी काफी कम हो गया है।\
36 साल के निचले स्तर पर सऊदी अरब का उत्पादन
सऊदी अरब ने बताया है कि उसके कच्चे तेल के उत्पादन में रोजाना करीब 19 लाख बैरल की कमी आई है। अब उत्पादन घटकर करीब 62 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया है। यह साल 1990 के बाद सऊदी अरब का सबसे कम उत्पादन बताया जा रहा है।

सिर्फ उत्पादन ही नहीं, सऊदी अरब से होने वाले तेल निर्यात में भी बड़ी गिरावट आई है। अगस्त में देश का तेल निर्यात करीब 40 फीसदी घट गया। प्रोविजनल टैंकर ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, सऊदी अरब का तेल निर्यात 51 लाख बैरल से घटकर करीब 31 लाख बैरल रह गया है।
सऊदी अरब ओपेक देशों में कच्चे तेल का सबसे बड़ा उत्पादक है। ऐसे में उसके उत्पादन और निर्यात में कमी का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों पर पड़ सकता है।
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भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंता?
सऊदी अरब भारत के प्रमुख तेल सप्लायर्स में से एक है। ईरान युद्ध से पहले सितंबर से फरवरी के बीच भारत को सऊदी अरब से रोजाना करीब 7.43 लाख बैरल तेल मिल रहा था। हालांकि, फरवरी से अगस्त के बीच यह सप्लाई घटकर करीब 4.40 लाख बैरल प्रतिदिन रह गई।
भारत अपनी जरूरत के करीब 90 फीसदी कच्चे तेल का आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का सीधा असर भारत के तेल आयात बिल पर पड़ सकता है।
तेल महंगा होने से देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ सकता है और रुपये की कीमत पर भी असर पड़ सकता है। इसके अलावा लंबे समय तक कच्चे तेल की कीमत ऊंची रहने पर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना भी बनी रहती है।
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लाल सागर और होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ा तनाव
ईरान युद्ध के बीच खाड़ी क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही भी प्रभावित हुई है। ईरान के जहाजों पर हमलों के कारण समुद्री व्यापार पर दबाव बढ़ा है।
वहीं, यमन के हूती विद्रोहियों के तटीय शहर मोचा पर कब्जे के बाद लाल सागर से गुजरने वाले जहाजों के लिए भी खतरा बढ़ गया है। मोचा बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के पास स्थित है। यह रास्ता अंतरराष्ट्रीय शिपिंग और तेल की सप्लाई के लिए काफी महत्वपूर्ण है।
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इन घटनाओं के कारण तेल की सप्लाई को लेकर बाजार में चिंता बढ़ी है। अगर सप्लाई में आगे भी कमी आती है, तो कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है। इसका असर भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश पर भी पड़ सकता है।
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