BRICS Summit: दिल्ली में दुनिया की बड़ी ताकतों का महामंच सजने जा रहा है। भारत की मेजबानी में होने वाली BRICS बैठक में कई बड़े देशों के नेता एक मंच पर नजर आएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग जैसे बड़े नेताओं की मौजूदगी इस बैठक को खास बना रही है।

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यह बैठक ऐसे समय में हो रही है, जब दुनिया युद्ध, आर्थिक अनिश्चितता, ट्रेड वॉर और तेजी से बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों से जूझ रही है। ऐसे में BRICS की इस बैठक पर पूरी दुनिया की नजर है।
BRICS से क्या बदलेगा?
BRICS को दुनिया के प्रभावशाली आर्थिक और राजनीतिक समूहों में गिना जाता है। समूह में शामिल देश वैश्विक अर्थव्यवस्था और आबादी का बड़ा हिस्सा रखते हैं। ऐसे में इस मंच पर होने वाली चर्चा का असर सिर्फ सदस्य देशों तक सीमित नहीं रहता।
इस बैठक में व्यापार, निवेश, ऊर्जा, डिजिटल इकोनॉमी और ग्लोबल साउथ से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। इसके अलावा तेल-गैस, सोलर एनर्जी, पोर्ट और रेल कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया जा सकता है।

सबसे ज्यादा चर्चा BRICS और डॉलर के दबदबे को लेकर है। सवाल उठ रहा है कि क्या BRICS देश अंतरराष्ट्रीय व्यापार में डॉलर पर निर्भरता कम करने की दिशा में कोई ठोस कदम उठा सकते हैं।
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मोदी-पुतिन और मोदी-शी की मुलाकात पर नजर
BRICS बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बातचीत अहम मानी जा रही है। भारत और रूस के बीच रक्षा, ऊर्जा और व्यापार के क्षेत्र में लंबे समय से सहयोग रहा है। ऐसे में दोनों नेताओं की बातचीत से द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
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वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच संभावित बातचीत पर भी सबकी नजर रहेगी। भारत और चीन के बीच सीमा विवाद और पिछले कुछ वर्षों में बने तनाव के बीच दोनों नेताओं की मुलाकात काफी महत्वपूर्ण हो सकती है।
अगर दोनों देशों के बीच संबंधों में सुधार के संकेत मिलते हैं, तो इसका असर व्यापार और क्षेत्रीय राजनीति पर भी पड़ सकता है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है BRICS?
BRICS की मेजबानी भारत के लिए सिर्फ एक अंतरराष्ट्रीय बैठक आयोजित करने का मौका नहीं है। यह भारत के लिए अपनी कूटनीतिक ताकत और वैश्विक भूमिका को मजबूत करने का भी अवसर है।
भारत एक तरफ अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ा रहा है, तो दूसरी तरफ रूस और BRICS देशों के साथ भी अपने संबंध मजबूत कर रहा है।
ऐसे में भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती अलग-अलग शक्तिशाली देशों के साथ अपने संबंधों में संतुलन बनाए रखने की है।
क्या BRICS बनाएगा नया शक्ति संतुलन?
BRICS की बैठक के दौरान होने वाले फैसले यह तय कर सकते हैं कि आने वाले समय में यह समूह वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में कितनी बड़ी भूमिका निभाएगा।
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क्या BRICS दुनिया में शक्ति का नया संतुलन बनाने की दिशा में आगे बढ़ेगा?
क्या ग्लोबल साउथ की आवाज को और मजबूती मिलेगी?
क्या व्यापार और निवेश के लिए नई राह खुलेगी?
और क्या डॉलर के दबदबे को चुनौती देने की कोई ठोस पहल होगी?
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