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बंगाल चुनाव: ‘फूलों की राजनीति’ में कमल बनाम फूल जोड़ी, किसके सिर सजेगा ताज?

Bengal elections
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बंगाल चुनाव:- पश्चिम बंगाल के चुनावी रण में इस बार सियासत ‘फूलों’ के इर्द-गिर्द घूमती नजर आ रही है। एक तरफ भारतीय जनता पार्टी का कमल है, तो दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस का ‘फूल जोड़ी’ चुनाव चिन्ह। दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज है, लेकिन मतदाता अब भी चुपचाप सब देख रहा है।

बीजेपी जहां बंगाल की ‘सूखी जमीन’ पर कमल खिलाने को बेताब है, वहीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपनी पार्टी की सत्ता बरकरार रखने के लिए पूरा दम लगा रही हैं।

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बीजेपी बनाम टीएमसी: मुद्दों की जंग तेज

बीजेपी ने इस बार ममता सरकार पर भ्रष्टाचार, अराजकता और तुष्टिकरण के आरोपों को बड़ा चुनावी मुद्दा बनाया है। वहीं ममता बनर्जी केंद्र सरकार पर भेदभाव, केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग और विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के आरोप लगा रही हैं।

राजनीतिक समीकरणों में ध्रुवीकरण की रणनीति भी साफ नजर आ रही है। जहां टीएमसी पारंपरिक वोट बैंक को साधने में जुटी है, वहीं बीजेपी हिंदू मतदाताओं को एकजुट करने की कोशिश कर रही है।

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मोदी बनाम दीदी: प्रतिष्ठा की लड़ाई

इस चुनाव को एक तरह से नरेन्द्र मोदी और अमित शाह बनाम ममता बनर्जी की सीधी टक्कर के रूप में देखा जा रहा है। बीजेपी के लिए यह सत्ता में आने का बड़ा मौका है, तो ममता बनर्जी चौथी बार जीत दर्ज करने की कोशिश में हैं।

ममता बनर्जी का राजनीतिक सफर

  • चार दशकों से सक्रिय राजनीति में
  • 2011 में ऐतिहासिक जीत के साथ सत्ता में आईं
  • 34 साल पुराने वाम शासन का अंत किया
  • राज्य की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं
  • पिछले 15 वर्षों से लगातार सत्ता में

हालांकि हाल के वर्षों में पार्टी के कई नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं, जिससे सरकार की छवि पर असर पड़ा है।

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महिला सुरक्षा और कानून-व्यवस्था पर सवाल

कोलकाता समेत कई शहरों में महिला सुरक्षा को लेकर मुद्दे उठे हैं। खासतौर पर आरजी कर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में जूनियर डॉक्टर के साथ दुष्कर्म और हत्या के मामले ने सरकार को कटघरे में खड़ा किया है।

चुनावी चरण और आगे की राह

  • पहले चरण में 152 सीटों पर मतदान संपन्न
  • दूसरे चरण में 29 अप्रैल को 142 सीटों पर मतदान

अब सभी की नजरें चुनाव परिणाम पर टिकी हैं, जो तय करेंगे कि बंगाल में सत्ता का ‘फूल’ खिलेगा या मुरझाएगा।

 

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