Panna News: खुले कैंप में सड़ा हजारों क्विंटल धान, शाखा प्रबंधक निलंबित

पन्ना। मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में खुले कैंप में रखा हजारों क्विंटल धान बारिश और लापरवाही के चलते खराब हो गया। धान की बोरियों में अंकुर फूटने के बाद मामला सामने आया, जिसके बाद मध्यप्रदेश वेयरहाउस कॉर्पोरेशन के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण किया।

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बताया जा रहा है कि खुले में रखे धान की बोरियों में बारिश का पानी पहुंचने से धान खराब होने लगा। कई बोरियों में अंकुर तक निकल आए। किसानों की महीनों की मेहनत इस तरह खराब होने से व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

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निरीक्षण के बाद शाखा प्रबंधक निलंबित

मामला सामने आने के बाद मध्यप्रदेश वेयरहाउस कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष संजय नगायच ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया। निरीक्षण के बाद भोपाल से लक्ष्मीपुर शाखा प्रबंधक वंदना बागरी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।

कार्रवाई के बाद अब सवाल उठ रहा है कि खुले कैंप में इतनी बड़ी मात्रा में धान को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं किए गए। बारिश के दौरान धान को खराब होने से बचाने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

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किसानों की मेहनत पर भारी पड़ी लापरवाही

किसान खेतों में महीनों मेहनत करके फसल तैयार करता है। इसके बाद सरकारी व्यवस्था के जरिए खरीदी गई फसल को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी संबंधित विभाग और वेयरहाउस की होती है। लेकिन यदि भंडारण के दौरान ही धान खराब होने लगे, तो इसका सीधा असर किसानों और सरकारी खजाने, दोनों पर पड़ता है।

पन्ना में सामने आया यह मामला सिर्फ धान के खराब होने तक सीमित नहीं है। यह सरकारी भंडारण व्यवस्था और अधिकारियों की जवाबदेही पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है।

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कार्रवाई के बाद भी उठ रहे सवाल

शाखा प्रबंधक के निलंबन के बाद तत्काल कार्रवाई तो हुई है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि खुले कैंप में रखे धान की स्थिति समय रहते अधिकारियों की नजर में क्यों नहीं आई।

किसान फसल पैदा करता है, सरकार उसकी खरीदी और सुरक्षा की जिम्मेदारी लेती है। ऐसे में अगर सरकारी व्यवस्था में ही अनाज खराब हो जाए, तो नुकसान सिर्फ धान का नहीं, बल्कि किसानों के भरोसे का भी है। अब देखना होगा कि इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है और खराब हुए धान की जिम्मेदारी किस स्तर तक तय की जाती है।

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