बजट 2026 के बाद बाजार में बड़ी गिरावट, इनकम टैक्स में नहीं मिली राहत

रेल, स्वास्थ्य और आयुर्वेद पर सरकार का फोकस

नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में केंद्रीय बजट 2026 पेश किया। बजट के पेश होने के बाद शेयर बाजार को कोई राहत नहीं मिली हैं, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ी गिरावट देखी गई हैं। सेंसेक्स करीब 1600 अंक टूटकर 80,600 के स्तर पर पहुंच चुका है, जबकि निफ्टी करीब 550 अंक गिरकर 24,800 से नीचे कारोबार करता दिखा।

विशेषज्ञों के मुताबिक, सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स (STT) को 0.02% से बढ़ाकर 0.05% किए जाने से बाजार में नकारात्मक माहौल बना हुआ है, जिसका सीधा असर शेयर बाजार पर पड़ा।

सोना-चांदी की कीमतों में गिरावट

बजट से पहले वायदा कारोबार में सोने और चांदी की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई। पिछले सप्ताह चांदी करीब 30% तक सस्ती हुई, जबकि सोना लगभग 17% फिसला। जानकारों का कहना है कि वैश्विक संकेतों, बजट को लेकर अनिश्चितता और मुनाफावसूली के कारण कीमती धातुओं पर दबाव बना हुआ है।

Budget 2026: Big drop in the market after Budget 2026
Budget 2026: Big drop in the market after Budget 2026

इनकम टैक्स में कोई बदलाव नहीं

सरकार ने इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया है। स्टैंडर्ड डिडक्शन भी पहले जैसा ही रहेगा। हालांकि, रिवाइज्ड इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के लिए अब 31 दिसंबर के बजाय 31 मार्च तक का समय मिलेगा। नया इनकम टैक्स एक्ट 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा और टैक्स फॉर्म्स को आसान बनाया जाएगा।

  • बजट 2026 की मुख्य घोषणाएं
  • 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बनाने का ऐलान
  • कैंसर की 17 दवाएं ड्यूटी फ्री, इलाज होगा सस्ता
  • 7 दुर्लभ बीमारियों की दवाओं पर भी आयात शुल्क खत्म
  • 3 आयुर्वेदिक AIIMS खोले जाएंगे
  • 5 मेडिकल टूरिज्म हब विकसित होंगे
  • 15,000 स्कूलों और 500 कॉलेजों में कंटेंट क्रिएटर लैब्स
  • करीब 800 जिलों में लड़कियों के लिए हॉस्टल
  • टियर-2 और टियर-3 शहरों के विकास के लिए ₹12.2 लाख करोड़

स्वास्थ्य और आयुर्वेद पर खास जोर हेल्थ सेक्टर को बढ़ावा

सरकार ने कैंसर, हीमोफिलिया, सिकल सेल और मस्कुलर डिस्ट्रॉफी जैसी कई बीमारियों की दवाओं पर कस्टम ड्यूटी हटाने का फैसला लिया है। इसके साथ ही भारत को आयुर्वेद और बायोफार्मा मैन्युफैक्चरिंग का ग्लोबल हब बनेगा।

आयुर्वेद को ग्लोबल पहचान दिलाने की तैयारी

सरकार ने आयुर्वेदिक सेक्टर में ₹10,000 करोड़ के निवेश का ऐलान किया है। इसके तहत 3 आयुर्वेदिक AIIMS, नेशनल टेस्टिंग लैब्स और बायोफार्मा मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दिया जाएगा।

महिलाओं और बच्चियों के लिए योजनाएं

लखपति दीदी मॉडल पर महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए SHE-मार्ट बनाए जाएंगे, जिससे महिलाएं अपने उत्पाद सीधे बेच सकेंगी। इसके अलावा, STEM शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए भी हर जिले में गर्ल्स हॉस्टल बनाने की घोषणा की गई हैं।

रेलवे, जलमार्ग और ग्रीन ट्रांसपोर्ट को मिली रफ्तार

मुंबई-पुणे, पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-चेन्नई, हैदराबाद-बेंगलुरु, चेन्नई-बेंगलुरु, दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलीगुड़ी के बीच हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बनाए जाएंगे। और अगले पांच साल में 20 नए राष्ट्रीय जलमार्ग विकसित होंगे।

रक्षा और अर्थव्यवस्था में 15% की बढ़ोतरी

बजट में रक्षा खर्च बढ़ाकर ₹7.84 लाख करोड़ कर दिया गया है, जो पिछले साल की तुलना में 15.2% अधिक है। सरकार का लक्ष्य राजकोषीय घाटे को GDP के 4.5% से नीचे रखना और कर्ज को अर्थव्यवस्था के 50% के आसपास बनाए रखना है।

प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बताया कि इस बजट में “रिफॉर्म एक्सप्रेस” को तेज गति मिलेगी । साथ ही उन्होंने कहा कि यह बजट हाई ग्रोथ और फिस्कल डिसिप्लिन का संतुलन बनाता है और भारत को वैश्विक स्तर पर मजबूत करने की दिशा में अहम कदम है।

Budget 2026 में इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया, जिससे शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली। जानिए बजट के बड़े ऐलान और असर।

Budget 2026: पेंशन टैक्स से लेकर क्लाइमेट इंश्योरेंस तक, बजट से उद्योग की 5 बड़ी अपेक्षाएं

केंद्रीय बजट 2026 को लेकर देश का वित्तीय सेवा क्षेत्र सरकार से बड़ी उम्मीदें जोड़ कर बैठा है। 1 फरवरी को पेश होने वाले इस बजट से पहले बीमा कंपनियों, NBFC, डिजिटल लेंडर्स और MSME सेक्टर ने अपनी पांच जरूरी मांगें सरकार के सामने रखी हैं। उद्योग का यह मानना है कि इन मांगों पर ध्यान देने से देश की आर्थिक सुरक्षा व्यवस्था और ज्यादा मजबूत हो सकती है।

From pension tax to climate insurance, 5 big expectations of the industry from the Budget
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सबसे पहली और जरूरी मांग पेंशन और एन्युटी पर टैक्स में समानता रखने पर हुई है। फिलहाल बीमा एन्युटी से मिलने वाली पूरी रकम पर टैक्स लगाया जाता है, जबकि निवेशक अपने मूलधन पर पहले ही टैक्स दे चुके होते हैं। इसके मुकाबले NPS में अतिरिक्त टैक्स छूट मिलती है। बीमा कंपनियां चाहती हैं कि एन्युटी में सिर्फ रिटर्न वाले हिस्से पर ही टैक्स लगे और बीमा आधारित पेंशन योजनाओं को भी NPS जैसी टैक्स छूट दी जाए।

दूसरी बड़ी मांग है कि जलवायु जोखिम बीमा को मजबूत करने से जुड़ी है। देश में बाढ़, हीटवेव और चरम मौसम की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में पैरामीट्रिक बीमा को बढ़ावा देने की जरूरत बताई जा रही है, ताकि नुकसान का आकलन जल्दी हो सके और लोगों को समय पर मुआवजा मिल सके। इसके लिए बेहतर क्लाइमेट डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर और पब्लिक-प्राइवेट रिस्क पूल तैयार करने की मांग की गई है।

तीसरा मुद्दा डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर से संबंधित है। बीमा उद्योग एक यूनिफाइड इंश्योरेंस डेटा एक्सचेंज चाहता है, जिससे फ्रॉड के मामलों में कमी आए, प्रीमियम तय करना आसान हो और उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़े। मजबूत डेटा सिस्टम से बीमा सेक्टर की पारदर्शिता भी बेहतर हो सकती है।

चौथी मांग कंपोजिट लाइसेंसिंग को लेकर है। उद्योग चाहता है कि एक ही कंपनी को लाइफ और नॉन-लाइफ दोनों तरह के बीमा उत्पाद देने की अनुमति मिले। इससे कंपनियों की लागत घटेगी और ग्राहकों को एक ही जगह पर बेहतर और सस्ते बीमा विकल्प मिल सकेंगे।

पांचवां और आखिरी मुद्दा माइक्रो-इंश्योरेंस और MSME लेंडिंग से जुड़ा है। कम प्रीमियम वाले बीमा प्रोडक्ट्स, आसान नियम और NBFC को बेहतर रीफाइनेंस सपोर्ट देने की मांग की जा रही है, ताकि छोटे कारोबारियों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सके।

कुल मिलाकर, बजट 2026 से यह उम्मीद की जा रही है कि सरकार बीमा और लोन को सिर्फ वित्तीय उत्पाद के रूप में नहीं, बल्कि हर भारतीय परिवार की आर्थिक सुरक्षा की मजबूत नींव के तौर पर देखेगी।

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