लाडली बहना योजना को लेकर अफवाह फैली, कलेक्टर ऑफिस में उमड़ी महिलाओं की भीड़

कटनी में लाडली बहना योजना को लेकर फैली अफवाहों ने प्रशासन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अज्ञात लोगों द्वारा यह भ्रम फैलाया गया कि योजना के फॉर्म दोबारा भरे जा रहे हैं, जिसके बाद सैकड़ों महिलाएं रोज़ाना कलेक्टर कार्यालय पहुंच रही हैं। हालात ऐसे बन गए कि कलेक्टर ऑफिस में रोज़ महिलाओं की भारी भीड़ जुटने लगी।

प्रशासनिक अधिकारियों ने महिलाओं को समझाने की कोशिश की कि फिलहाल योजना का न तो पोर्टल खुला है और न ही ऑफलाइन फॉर्म भरने के आदेश हैं, लेकिन महिलाएं यह बात मानने को तैयार नहीं हुईं। मजबूरी में प्रशासन को महिलाओं के आवेदन जमा करने पड़े। बीते कुछ दिनों में 5000 से अधिक फॉर्म कलेक्टर कार्यालय में जमा हो चुके हैं।

एक सप्ताह पहले कलेक्टर कार्यालय के बाहर कुछ संगठनों ने प्रदर्शन कर लाडली बहना योजना से वंचित महिलाओं को लाभ देने और ₹3000 मासिक सहायता की मांग उठाई थी। इसी बीच अफवाह फैली कि नाम जोड़ने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसके बाद नगर निगम क्षेत्र और आसपास के गांवों से महिलाएं फॉर्म लेकर कलेक्टर ऑफिस पहुंचने लगीं, जिससे प्रशासनिक कार्य बुरी तरह प्रभावित हुआ।

अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि जमा हुए हजारों फॉर्म आखिर भेजे कहां जाएं। वहीं, इस अफवाह का फायदा उठाकर फोटो कॉपी और फॉर्म संचालक मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। एक पेज का फॉर्म 10 से 20 रुपये में बेचा जा रहा है, जिसमें समग्र आईडी और आधार कार्ड की फोटो भी लगवाई जा रही है। लगातार बढ़ती भीड़ और अव्यवस्था ने प्रशासन की चिंता और बढ़ा दी है।

यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, 19 मार्च को अगली सुनवाई

यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल रोक लगा दी है। सुनवाई के दौरान अदालत ने इन नियमों के संभावित दुरुपयोग को लेकर चिंता जताई और कहा कि किसी भी व्यवस्था में सभी नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा सबसे ज़रूरी है। कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब माँगते हुए मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च को तय की है।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि फिलहाल विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में 2012 के पुराने नियम ही लागू रहेंगे। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह जाँचना आवश्यक है कि नए नियम समानता और निष्पक्षता के सिद्धांतों पर खरे उतरते हैं या नहीं। इस उद्देश्य से एक विशेष समिति के गठन की संभावना पर भी विचार किया जा सकता है।
UGC के नए नियम लागू होने के बाद से देशभर में विरोध तेज हो गया है। छात्रों और विभिन्न संगठनों ने चेन्नई सहित कई शहरों में प्रदर्शन किए। वहीं, दिल्ली स्थित UGC मुख्यालय के बाहर भी धरना दिया गया। उत्तर प्रदेश के बरेली में एक सिटी मजिस्ट्रेट ने नियमों से असहमति जताते हुए इस्तीफा दे दिया, जबकि रायबरेली और लखनऊ में भाजपा से जुड़े कुछ नेताओं ने भी अपने पदों से त्यागपत्र दिया है।
UGC के नए नियमों के तहत कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में शिकायत निवारण के लिए विशेष समितियों, हेल्पलाइन और निगरानी तंत्र की व्यवस्था की गई है। नियमों का पालन न करने वाले संस्थानों की मान्यता रद्द या निलंबित की जा सकती है। हालांकि, सामान्य वर्ग के कुछ लोगों का कहना है कि इन प्रावधानों से कैंपस में नई समस्याएँ और तनाव पैदा हो सकते हैं।

गुनौर बालिका छात्रावास में अव्यवस्थाओं की पोल खुली, खराब भोजन को लेकर छात्राओं का हंगाम

पन्ना | पन्ना जिले की गुनौर विधानसभा में स्थित नेताजी सुभाष चंद्र बोस बालिका छात्रावास में अव्यवस्थाओं की गंभीर तस्वीर सामने आई है। छात्रावास में विगत छह वर्षों से पदस्थ अधीक्षिका और दो वर्षों से कार्यरत रसोइया के आपसी टकराव के बीच छात्राओं को मिलने वाले भोजन और व्यवहार को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया।

The chaos at the Gunaur girls' hostel has been exposed, with students protesting over poor food.
The chaos at the Gunaur girls’ hostel has been exposed, with students protesting over poor food.

छात्राओं का आरोप है कि उन्हें जला‑भुना और खराब गुणवत्ता का भोजन परोसा जा रहा है, जबकि रसोइया अपने लिए अलग से अच्छा खाना बनाती हैं। छात्राओं ने रसोइयों पर भेदभाव, जातिवाद और मनमानी का आरोप लगाते हुए कहा कि कई बार शिकायत करने के बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ।

The chaos at the Gunaur girls' hostel has been exposed, with students protesting over poor food.
The chaos at the Gunaur girls’ hostel has been exposed, with students protesting over poor food.

आक्रोशित छात्राएं छात्रावास के बाहर धरने पर बैठ गईं और नारेबाजी की। रो‑रोकर छात्राओं ने अपने साथ हो रहे व्यवहार की जानकारी दी और अपने अभिभावकों को फोन कर पूरी स्थिति से अवगत कराया। सूचना मिलते ही स्थानीय लोग और जनप्रतिनिधि भी मौके पर पहुंच गए।

मामले की जानकारी मिलते ही गुनौर पुलिस और तहसीलदार रत्नाराशि पांडे छात्रावास पहुंचीं और स्थिति को नियंत्रित किया। घटना के बाद प्रशासनिक लापरवाही और छात्रावासों की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ स्टाफ के कारण अनुशासन और व्यवस्था प्रभावित होती है, इसलिए पूरे स्टाफ को बदलकर नए कर्मचारियों की नियुक्ति की जानी चाहिए।

इस मामले में डीपीसी अजय गुप्ता ने बताया कि छात्राओं द्वारा भोजन की शिकायत की गई है, वहीं रसोइयों की ओर से भी छात्राओं को लेकर शिकायतें सामने आई हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की जा रही है और जांच रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

गणतंत्र दिवस पर्व पर सरकारी स्कूल में किताबों के पन्नों परपरोसा गया बच्चों को भोजन 

26 जनवरी 2026 को जब पूरा देश गणतंत्र दिवस गर्व और उत्साह के साथ मनाया जा रहा था उसी दिन मध्य प्रदेश के मैहर जिले के शासकीय हाई स्कूल में आयोजित मिड डे मील के दौरान बच्चों को ना तो थाली दी गई और ना ही डिस्पोजल पत्तल मजबूरी में पुरानी पड़ी कॉपी किताबों के पन्ने फाड़कर उन्हीं पर परोसा गया भोजन, जिस पर बच्चों को मजबूरी में खाना पड़ा

On Republic Day, food was served to children on the pages of books in a government school.
On Republic Day, food was served to children on the pages of books in a government school.

यह घटना न केवल बच्चों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है बल्कि उसकी गरिमा और स्वाभिमान पर भी सीधा आघात करती है हैरानी की बात तो यह है की सरकारी स्कूलों में भोजन योजना के तहत स्टील की थाली की व्यवस्था अनिवार्य होती है इसके बावजूद इस तरह की लापरवाही सामने आना स्कूल प्रबंधन की गंभीरता को दर्शाता है

गणतंत्र दिवस के अवसर पर स्कूल ध्वजारोहण और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए थे, कार्यक्रम के बाद विशेष भोज के रूप में मिड – डे मील परोसा गया , लेकिन जो दृश्य सामने आया है उसने हर किसी को स्तब्ध कर दिया है तस्वीरें और वीडियो में साफ देखा जा रहा है कि बच्चे स्कूल के मैदान में जमीन पर बैठे हैं और उनके सामने बिछे हैं, फटे हुए किताबें कॉपियों के पन्ने, जिस पर स्याही के दाग और गंदगी साफ नजर आ रही है।

इन्हीं गंदे कागजों पर हलवा पूरी पड़ोसी गई , जिससे भोजन की स्वच्छता पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं इस घटना ने शिक्षा विभाग और प्रशासन की पोल खोल के रख दी है जिसमें बच्चों को बेहतर सुविधा और सम्मानजनक माहौल देने की बात कही जाती है

सोशल मीडिया पर हुए वायरल वीडियो के बाद पूरे प्रदेश में आक्रोश फैल गया है लोग दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे है, अब यह देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या भविष्य में बच्चों के साथ ऐसा व्यवहार दोहराया नहीं जाएगा।

शंकराचार्य होने के सबूत मांगने पर भड़की उमा भारती , प्रशासन पर लगाए मर्यादा तोड़ने का आरोप 

प्रयागराज के माघ मेले में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और यूपी सरकार व प्रशासन के बीच विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है । शंकराचार्य होने के प्रमाण मागे जाने को लेकर प्रशासन के खिलाफ आलोचना हो रही है। इसी बीच मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी की वरिष्ठ नेता साध्वी उमा भारती भी खुलकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में सामने आई हैं।

Uma Bharti gets angry when asked for proof of being Shankaracharya
Uma Bharti gets angry when asked for proof of being Shankaracharya

उमा भारती ने प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा शंकराचार्य होने के सबूत मांगे जाने को पूरी तरह अनुचित और मर्यादाहीन आचरण बताया है उन्होंने कहा कि किसी प्रशासनिक अधिकारी को यह अधिकार नहीं है कि वह शंकराचार्य जैसे धार्मिक पद पर आसीन व्यक्ति से प्रमाण मांगे। उनके अनुसार यह अधिकार केवल अन्य शंकराचार्यों और विद्वत परिषद को ही है उन्होंने उम्मीद जताई कि इस विवाद का समाधान सम्मानजनक तरीके से निकलेगा

 

पूर्व सीएम उमा भारती ने इस मुद्दे पर सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एम्स पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने साफ कहा कि धार्मिक परंपराओं और संस्थाओं की एक तय मर्यादा होती है, जिसे लांघना किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं है। उमा भारती के बयान के बाद यह मामला और गरमा गया है और सरकार व प्रशासन पर दबाव बढ़ता नजर आ रहा है

शंकराचार्य होने के सबूत मांगने पर भड़की उमा भारती , प्रशासन पर लगाए मर्यादा तोड़ने का आरोप

शंकराचार्य होने के सबूत मांगने पर भड़की उमा भारती , प्रशासन पर लगाए मर्यादा तोड़ने का आरोप

प्रयागराज के माघ मेले में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और यूपी सरकार व प्रशासन के बीच विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है । शंकराचार्य होने के प्रमाण मागे जाने को लेकर प्रशासन के खिलाफ आलोचना हो रही है। इसी बीच मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी की वरिष्ठ नेता साध्वी उमा भारती भी खुलकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में सामने आई हैं।

उमा भारती ने प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा शंकराचार्य होने के सबूत मांगे जाने को पूरी तरह अनुचित और मर्यादाहीन आचरण बताया है उन्होंने कहा कि किसी प्रशासनिक अधिकारी को यह अधिकार नहीं है कि वह शंकराचार्य जैसे धार्मिक पद पर आसीन व्यक्ति से प्रमाण मांगे। उनके अनुसार यह अधिकार केवल अन्य शंकराचार्यों और विद्वत परिषद को ही है उन्होंने उम्मीद जताई कि इस विवाद का समाधान सम्मानजनक तरीके से निकलेगा

पूर्व सीएम उमा भारती ने इस मुद्दे पर सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एम्स पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने साफ कहा कि धार्मिक परंपराओं और संस्थाओं की एक तय मर्यादा होती है, जिसे लांघना किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं है। उमा भारती के बयान के बाद यह मामला और गरमा गया है और सरकार व प्रशासन पर दबाव बढ़ता नजर आ रहा है

सुप्रीम कोर्ट ने कहा ‘महाकाल के सामने कोई VIP नहीं’, सुनवाई से इनकार

विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग उज्जैन महाकाल धाम में गर्भगृह में VIP के प्रवेश के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इंकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को अपनी मांग मंदिर प्रशासन के सामने रखने को कहा है। कोर्ट ने कहा कि महाकाल के सामने कोई भी VIP नहीं हैकोर्ट ने कहा कि मंदिर के गर्भगृह मे कौन जाएगा कौन नहीं? ये फैसला अदालते क्यों करें, आप मंदिर प्रशासन से अपनी बात रख सकते है। 

VIP Darshan Mahakaleshwar Temple
VIP Darshan Mahakaleshwar Temple

महाकाल के सामने कोई वीआईपी नहीं 

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया है कि वो अपनी मांग मंदिर प्रशासन  के सामने रखें…कोर्ट ने कहा कि विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग बाबा महाकाल के सामने सब बराबर है कोई विशेष दर्जा वाला नहीं होता। गर्भगृह में प्रवेश का नियम तय करने का अधिकार मंदिर कमेटी और जिला प्रशासन के पास है, अदालत इसमें क्यों हस्तक्षेप करे?

VIP Darshan Mahakaleshwar Temple
VIP Darshan Mahakaleshwar Temple

 

याचिकाकर्ता का आरोप

 वहीं सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता का कहना है कि महाकाल दर्शन मे इस तरह के नियम समानता के अधिकार का उल्लंघन करता है। गर्भ गृह में प्रवेश बीते ढाई वर्षों से बंद है, लेकिन इस बीच आरोप है कि नियमों को ताक पर रख वीआईपी एंट्री दी जाती है  

इंदौर बेंच ने भी खारिज कर दी थी याचिका

 

इस सुनवाई से पहले अगस्त 2025 में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने भी इसी तरह की याचिका खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट ने कहा था कि गर्भगृह में प्रवेश का फैसला उज्जैन के जिला कलेक्टर और महाकाल मंदिर प्रशासक को ही करना है, अदालत इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकती।

 

कोरोना काल से बंद है गर्भगृह में प्रवेश

आपको बता दें कि महाकाल दरबार में कोरोना काल के बाद से गर्भगृह में आम दर्शन बंद हैं। श्रद्धालु बाहरी क्षेत्र से ही भगवान महाकाल के दर्शन कर पाते हैं। हालांकि कई बार वीआईपी नेता और प्रभावशाली व्यक्तियों को विशेष अनुमति से गर्भगृह में प्रवेश की खबरें सामने आती रही हैं, जिससे आम भक्तों में नाराजगी बनी हुई है

VIP दर्शन पर रोक से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब याचिकाकर्ता को मंदिर प्रशासन से बातचीत करनी होगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि धार्मिक स्थलों के आंतरिक नियमों और प्रबंधन में अदालत का हस्तक्षेप सीमित होना चाहिए। इस फैसले से मंदिर प्रशासन पर दबाव बढ़ सकता है कि वह नियमों को पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से लागू करे।

टीवी पर दस्तक देने के लिए तैयार हैं नए सीरियल्स, ‘अनुपमा’ और ‘नागिन’ को मिलेगी टक्कर

 

टीवी मसाला:फरवरी के महीने में टीवी इंडस्ट्री में कई बड़े सीरियल शुरु होने वाला है जिसकी वजह से पुराने सीरियल TRP की रेस में पीछे हो सकते हैं सबसे पहले 27 जनवरी से टीवी एक्ट्रेस ऐश्वर्या खरे अपने नए सीरियल ‘डॉक्टर आरंभी’ के साथ वापसी करने वाली हैं। जिसमें सीरियल की लीड स्टार आरंभी शादी के कई सालों बाद डॉक्टर बनती है और उसी अस्पताल में पोस्टिंग लेंगी जहां उसके पति डॉक्टर हैं इनदोनों पति-पत्नी के बीच अनबन और डॉक्टर बनने का सपना आरंभी को हिट बना सकता है वहीं एक्टर नील भट्ट टीवी पर धमाकेदार वापसी करने तैयार है सीरियल मिस्टर एंड मिसेज परशुराम के जरिए..जिसमें नील सीक्रेट कॉप के रोल में नजर आएंगे और एक फेमिली मैन की तरह दिखेंगे…टीवी सीरियल ‘इश्क का ओटीपी’ भी छोटे पर्दे पर रिलीज के लिए तैयार है। इस शो में राची शर्मा और एक्टर विक्रम सिंह चौहान मुख्य भूमिका अदा करते दिखाई देंगे। शो का फर्स्ट लुक तो सामने आ चुका है, लेकिन रिलीज डेट का अभी कुछ नहीं पता है। जल्द ही सीरियल ‘यादें’ की एंट्री होने वाली है, जिसके जरिए एक्टर इकबाल खान लंबे वक्त बाद छोटे पर्दे पर वापसी करेंगे। इस शो में वो एक डॉक्टर का किरदार अदा करेंगे। टीवी पर जल्द ही भाविका शर्मा और शक्ति अरोड़ा स्टारर ‘मौनरागम’ की एंट्री होने वाली है। हालांकि इस शो की रिलीज डेट अभी तक सामने नहीं आई है। बता दें कि ‘गुम है किसी के प्यार में’ के बाद दूसरी बार शक्ति अरोड़ा और भाविका शर्मा की जोड़ी देखने को मिलेगी। टीवी पर जल्द ही ‘द 50’ की भी शुरुआत होने वाली है। इस शो में 50 कंटेस्टेंट्स कदम रखेंगे, जिसमें टीवी की कई खास पर्सनालिटीज के साथ-साथ सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर भी शामिल हैं। ये शो 1 फरवरी से शुरू होगा।

doctor arambhi
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‘अनुपमा’ को होगा खतरा !

 

बतादेंकि इस वक्त टीवी इंडस्ट्री में सीरियल अनुपमा का बोलबाला चल रहा है वहीं क्योंकि सास भी कभी बहू थी सीजन-2 हिट लिस्ट में आगे चल रहा है तो वहीं हालही में नागिन 7 की शुरुआत हुई है जिसे दर्शकों से अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है जिन्होंने टीआरपी की रेस में जगह बनाई हुई है वहीं सीरियल ये रिश्ता क्या कहलाता है का नया सीजन भी दर्शकों का दिल जीतने में कामयाब हो रहा है

naagin 7
naagin 7

नागिन-7 को लगेगा झटका

 

बतादेंकि नागिन 7 में ईशा सिंह और प्रियंका चाहर चौधरी लीड रोल में नजरआ रही थीं जहां नागिन-7 अपने बदले की तरफ बढ़ चुका है तो वहीं मास्टर शेफ इंडिया का नया सीजन भी लोगों को पसंद आ रहा है दोनों ही शोज अच्छे चल रहा हैं लेकिन दर्शक एक तरह की सास बहू और साजिश जैसे सीरियल देखकर बोर हो चुके हैं इसलिए प्रोड्यसूर नए नए शो लाकर दर्शकों टेस्ट को देखते हुए नई कहानी लेकर आ रहे हैं

मऊगंज में गौ माता के नाम पर लूट का आरोप, भ्रष्टाचार के खिलाफ सड़क पर उतरे समाजसेवी

मऊगंज में गौ माता के सम्मान और गौशालाओं में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार के विरोध में सोमवार को एक दिवसीय सांकेतिक अनशन किया गया। समाजसेवियों और स्थानीय नागरिकों ने गौशालाओं में फर्जी सत्यापन और बिना जमीनी हकीकत के शासकीय राशि के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए शासन-प्रशासन को खुली चेतावनी दी।

अनशन पर बैठे समाजसेवी अखिलेश पाण्डेय सहित अन्य गणमान्य नागरिकों ने कहा कि बेलहा, रमकुड़वा, हाटा, बघैला और मलैगवा पंचायतों की गौशालाएँ केवल कागजों में संचालित हो रही हैं। जमीनी स्तर पर गौ माता की स्थिति दयनीय है, जबकि उनके नाम पर शासकीय धन का कथित रूप से गबन किया जा रहा है। उन्होंने इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही के साथ-साथ गौ माता के सम्मान के साथ विश्वासघात बताया।

प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि तत्काल प्रभाव से इन पांचों पंचायतों की गौशालाओं को निरस्त किया जाए, गबन की गई राशि की वसूली की जाए और दोषी अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों के खिलाफ सख्त संवैधानिक कार्रवाई की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि आने वाले दिनों में यह सांकेतिक अनशन वृहद जन आंदोलन और आमरण अनशन का रूप ले सकता है, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
आंदोलनकारी ने बताया कि जब तक संलिप्त लोगों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक प्रतिदिन सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक अनशन जारी रहेगा।

हिंदी थोपने का हमेशा विरोध करेंगे, तमिल से प्यार कभी खत्म नहीं होगा: स्टालिन का दो टूक बयान

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और डीएमके अध्यक्ष एम के स्टालिन का हिंदी भाषा को लेकर एक बयान सामने आया है। जहां विधानसभा के चुनाव नज़दीक होने के दौरान स्टालिन ने अपनी बात साफ रखी कि  ” हिंदी भाषा के लिए तमिलनाडु में कोई जगह नहीं है और नहीं कभी हिंदी भाषा के लिए भविष्य में जगह बन सकती है। ” उन्होंने अपने दो टूक शब्दों में यह कहा कि “हिंदी थोपने का हमेशा विरोध ही किया जाएगा और तमिल भाषा के लिए उनका प्यार कभी खत्म नहीं होगा।

I will always oppose the imposition of Hindi.
I will always oppose the imposition of Hindi.

‘भाषा शहीद दिवस’ के मौके पर रविवार को मुख्यमंत्री स्टालिन ने उन लोगों को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने 1964-65 के हिंदी विरोधी आंदोलन के समय अपनी जान कुर्बान कर दी थी। और इसी बीच उन्होंने यह कहा कि तमिलनाडु एक ऐसा राज्य है, जिसने अपनी भाषा से अपनी जान की तरह प्यार किया है और जब-जब हिंदी थोपने की कोशिश हुई, तब-तब पूरे राज्य ने एकजुट होकर उसका विरोध किया और आगे भी करेंगे।

एम के स्टालिन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक पोस्ट लिखा है कि “आज भाषा शहीद दिवस है। तब, अब और हमेशा तमिलनाडु में हिंदी के लिए कोई जगह नहीं है।”  इसके साथ ही उन्होंने हिंदी खिलाफ आंदोलन से जुड़े इतिहास का एक छोटा वीडियो भी साझा किया, जिसमें 1965 के आंदोलन के दृश्य और डीएमके के दिग्गज नेताओं सीएन अन्नादुरई और एम करुणानिधि के योगदान को साफ दिखाया गया।

मुख्यमंत्री ने साथ ही अपने संदेश में कहा कि वे उन सभी शहीदों को कृतज्ञतापूर्वक नमन करते हैं, जिन्होंने तमिल भाषा की रक्षा के लिए अपनी कीमती जान दे दी। और भाषा के नाम पर कोई और जान नहीं जाएगी, लेकिन तमिल के लिए संघर्ष और प्रेम हमेशा जिंदा रहेगा। स्टालिन ने यह भी दोहराया कि उनकी पार्टी हिंदी भाषा थोपने पर किसी भी कीमत कर विरोध करती रहेगी।

इस बात पर ध्यान देना जरूरी रहा कि 1964-65 में पूरे तमिलनाडु में हिंदी के खिलाफ जोरदार आंदोलन हुआ था, जिसमें कई सारे लोगों ने आत्मदाह कर अपनी जान दे दी थी। और इन्हीं लोगों को ‘भाषा शहीद’ के रूप माना जाता है। आज भी तमिलनाडु दो-भाषा फॉर्मूले — तमिल और अंग्रेजी — का पालन करता है। दूसरी तरफ डीएमके केंद्र सरकार की नई शिक्षा नीति 2020 के जरिए हिंदी थोपने का आरोप लगती सामने आई है।

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