लाडली बहना योजना को लेकर अफवाह फैली, कलेक्टर ऑफिस में उमड़ी महिलाओं की भीड़

कटनी में लाडली बहना योजना को लेकर फैली अफवाहों ने प्रशासन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अज्ञात लोगों द्वारा यह भ्रम फैलाया गया कि योजना के फॉर्म दोबारा भरे जा रहे हैं, जिसके बाद सैकड़ों महिलाएं रोज़ाना कलेक्टर कार्यालय पहुंच रही हैं। हालात ऐसे बन गए कि कलेक्टर ऑफिस में रोज़ महिलाओं की भारी भीड़ जुटने लगी।

प्रशासनिक अधिकारियों ने महिलाओं को समझाने की कोशिश की कि फिलहाल योजना का न तो पोर्टल खुला है और न ही ऑफलाइन फॉर्म भरने के आदेश हैं, लेकिन महिलाएं यह बात मानने को तैयार नहीं हुईं। मजबूरी में प्रशासन को महिलाओं के आवेदन जमा करने पड़े। बीते कुछ दिनों में 5000 से अधिक फॉर्म कलेक्टर कार्यालय में जमा हो चुके हैं।

एक सप्ताह पहले कलेक्टर कार्यालय के बाहर कुछ संगठनों ने प्रदर्शन कर लाडली बहना योजना से वंचित महिलाओं को लाभ देने और ₹3000 मासिक सहायता की मांग उठाई थी। इसी बीच अफवाह फैली कि नाम जोड़ने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसके बाद नगर निगम क्षेत्र और आसपास के गांवों से महिलाएं फॉर्म लेकर कलेक्टर ऑफिस पहुंचने लगीं, जिससे प्रशासनिक कार्य बुरी तरह प्रभावित हुआ।

अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि जमा हुए हजारों फॉर्म आखिर भेजे कहां जाएं। वहीं, इस अफवाह का फायदा उठाकर फोटो कॉपी और फॉर्म संचालक मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। एक पेज का फॉर्म 10 से 20 रुपये में बेचा जा रहा है, जिसमें समग्र आईडी और आधार कार्ड की फोटो भी लगवाई जा रही है। लगातार बढ़ती भीड़ और अव्यवस्था ने प्रशासन की चिंता और बढ़ा दी है।

यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, 19 मार्च को अगली सुनवाई

यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल रोक लगा दी है। सुनवाई के दौरान अदालत ने इन नियमों के संभावित दुरुपयोग को लेकर चिंता जताई और कहा कि किसी भी व्यवस्था में सभी नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा सबसे ज़रूरी है। कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब माँगते हुए मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च को तय की है।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि फिलहाल विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में 2012 के पुराने नियम ही लागू रहेंगे। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह जाँचना आवश्यक है कि नए नियम समानता और निष्पक्षता के सिद्धांतों पर खरे उतरते हैं या नहीं। इस उद्देश्य से एक विशेष समिति के गठन की संभावना पर भी विचार किया जा सकता है।
UGC के नए नियम लागू होने के बाद से देशभर में विरोध तेज हो गया है। छात्रों और विभिन्न संगठनों ने चेन्नई सहित कई शहरों में प्रदर्शन किए। वहीं, दिल्ली स्थित UGC मुख्यालय के बाहर भी धरना दिया गया। उत्तर प्रदेश के बरेली में एक सिटी मजिस्ट्रेट ने नियमों से असहमति जताते हुए इस्तीफा दे दिया, जबकि रायबरेली और लखनऊ में भाजपा से जुड़े कुछ नेताओं ने भी अपने पदों से त्यागपत्र दिया है।
UGC के नए नियमों के तहत कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में शिकायत निवारण के लिए विशेष समितियों, हेल्पलाइन और निगरानी तंत्र की व्यवस्था की गई है। नियमों का पालन न करने वाले संस्थानों की मान्यता रद्द या निलंबित की जा सकती है। हालांकि, सामान्य वर्ग के कुछ लोगों का कहना है कि इन प्रावधानों से कैंपस में नई समस्याएँ और तनाव पैदा हो सकते हैं।

गणतंत्र दिवस पर्व पर सरकारी स्कूल में किताबों के पन्नों परपरोसा गया बच्चों को भोजन 

26 जनवरी 2026 को जब पूरा देश गणतंत्र दिवस गर्व और उत्साह के साथ मनाया जा रहा था उसी दिन मध्य प्रदेश के मैहर जिले के शासकीय हाई स्कूल में आयोजित मिड डे मील के दौरान बच्चों को ना तो थाली दी गई और ना ही डिस्पोजल पत्तल मजबूरी में पुरानी पड़ी कॉपी किताबों के पन्ने फाड़कर उन्हीं पर परोसा गया भोजन, जिस पर बच्चों को मजबूरी में खाना पड़ा

On Republic Day, food was served to children on the pages of books in a government school.
On Republic Day, food was served to children on the pages of books in a government school.

यह घटना न केवल बच्चों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है बल्कि उसकी गरिमा और स्वाभिमान पर भी सीधा आघात करती है हैरानी की बात तो यह है की सरकारी स्कूलों में भोजन योजना के तहत स्टील की थाली की व्यवस्था अनिवार्य होती है इसके बावजूद इस तरह की लापरवाही सामने आना स्कूल प्रबंधन की गंभीरता को दर्शाता है

गणतंत्र दिवस के अवसर पर स्कूल ध्वजारोहण और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए थे, कार्यक्रम के बाद विशेष भोज के रूप में मिड – डे मील परोसा गया , लेकिन जो दृश्य सामने आया है उसने हर किसी को स्तब्ध कर दिया है तस्वीरें और वीडियो में साफ देखा जा रहा है कि बच्चे स्कूल के मैदान में जमीन पर बैठे हैं और उनके सामने बिछे हैं, फटे हुए किताबें कॉपियों के पन्ने, जिस पर स्याही के दाग और गंदगी साफ नजर आ रही है।

इन्हीं गंदे कागजों पर हलवा पूरी पड़ोसी गई , जिससे भोजन की स्वच्छता पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं इस घटना ने शिक्षा विभाग और प्रशासन की पोल खोल के रख दी है जिसमें बच्चों को बेहतर सुविधा और सम्मानजनक माहौल देने की बात कही जाती है

सोशल मीडिया पर हुए वायरल वीडियो के बाद पूरे प्रदेश में आक्रोश फैल गया है लोग दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे है, अब यह देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या भविष्य में बच्चों के साथ ऐसा व्यवहार दोहराया नहीं जाएगा।

शंकराचार्य होने के सबूत मांगने पर भड़की उमा भारती , प्रशासन पर लगाए मर्यादा तोड़ने का आरोप 

प्रयागराज के माघ मेले में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और यूपी सरकार व प्रशासन के बीच विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है । शंकराचार्य होने के प्रमाण मागे जाने को लेकर प्रशासन के खिलाफ आलोचना हो रही है। इसी बीच मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी की वरिष्ठ नेता साध्वी उमा भारती भी खुलकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में सामने आई हैं।

Uma Bharti gets angry when asked for proof of being Shankaracharya
Uma Bharti gets angry when asked for proof of being Shankaracharya

उमा भारती ने प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा शंकराचार्य होने के सबूत मांगे जाने को पूरी तरह अनुचित और मर्यादाहीन आचरण बताया है उन्होंने कहा कि किसी प्रशासनिक अधिकारी को यह अधिकार नहीं है कि वह शंकराचार्य जैसे धार्मिक पद पर आसीन व्यक्ति से प्रमाण मांगे। उनके अनुसार यह अधिकार केवल अन्य शंकराचार्यों और विद्वत परिषद को ही है उन्होंने उम्मीद जताई कि इस विवाद का समाधान सम्मानजनक तरीके से निकलेगा

 

पूर्व सीएम उमा भारती ने इस मुद्दे पर सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एम्स पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने साफ कहा कि धार्मिक परंपराओं और संस्थाओं की एक तय मर्यादा होती है, जिसे लांघना किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं है। उमा भारती के बयान के बाद यह मामला और गरमा गया है और सरकार व प्रशासन पर दबाव बढ़ता नजर आ रहा है

शंकराचार्य होने के सबूत मांगने पर भड़की उमा भारती , प्रशासन पर लगाए मर्यादा तोड़ने का आरोप

शंकराचार्य होने के सबूत मांगने पर भड़की उमा भारती , प्रशासन पर लगाए मर्यादा तोड़ने का आरोप

प्रयागराज के माघ मेले में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और यूपी सरकार व प्रशासन के बीच विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है । शंकराचार्य होने के प्रमाण मागे जाने को लेकर प्रशासन के खिलाफ आलोचना हो रही है। इसी बीच मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी की वरिष्ठ नेता साध्वी उमा भारती भी खुलकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में सामने आई हैं।

उमा भारती ने प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा शंकराचार्य होने के सबूत मांगे जाने को पूरी तरह अनुचित और मर्यादाहीन आचरण बताया है उन्होंने कहा कि किसी प्रशासनिक अधिकारी को यह अधिकार नहीं है कि वह शंकराचार्य जैसे धार्मिक पद पर आसीन व्यक्ति से प्रमाण मांगे। उनके अनुसार यह अधिकार केवल अन्य शंकराचार्यों और विद्वत परिषद को ही है उन्होंने उम्मीद जताई कि इस विवाद का समाधान सम्मानजनक तरीके से निकलेगा

पूर्व सीएम उमा भारती ने इस मुद्दे पर सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एम्स पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने साफ कहा कि धार्मिक परंपराओं और संस्थाओं की एक तय मर्यादा होती है, जिसे लांघना किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं है। उमा भारती के बयान के बाद यह मामला और गरमा गया है और सरकार व प्रशासन पर दबाव बढ़ता नजर आ रहा है

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