मध्य प्रदेश बीजेपी में ‘टाइमलाइन सिस्टम’ लागू: अब नेताओं की नहीं, संगठन की घड़ी चलेगी

मध्य प्रदेश बीजेपी में अब नेताओं की मनमर्जी और लापरवाही पर रोक लगाने की तैयारी हो गई है। पार्टी ने अपने संगठन को अधिक अनुशासित और प्रोफेशनल बनाने के लिए ‘टाइमलाइन सिस्टम’ लागू करने का फैसला लिया है। अब बैठकें और दौरे किसी बड़े नेता की सुविधा से नहीं, बल्कि तय तारीखों के अनुसार होंगे।

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How Did Low Turnout Affect BJP? A Phase-Wise Analysis

सत्ता और संगठन के बीच बेहतर तालमेल के लिए भारतीय जनता पार्टी मध्य प्रदेश में एक बड़े बदलाव की ओर बढ़ रही है। मुख्यमंत्री मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के नेतृत्व में पार्टी ने कार्यप्रणाली को कॉर्पोरेट स्टाइल में ढालते हुए एक फिक्स कैलेंडर लागू किया है।

अब पार्टी का हर कार्यक्रम पहले से तय टाइमलाइन के अनुसार ही आयोजित होगा। इससे संगठन में अनुशासन बढ़ाने और कार्यकर्ताओं की भागीदारी सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है।

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बैठक और कार्यक्रम का नया कैलेंडर

  • महीने का पहला हफ्ता: मंडल स्तर की बैठकें
  • 7 से 10 तारीख: जिला स्तर की बैठकें
  • 11 से 20 तारीख: प्रदेश स्तर की बैठकें और वरिष्ठ नेताओं के दौरे
  • चौथा हफ्ता: शक्ति केंद्र और मंडल की समीक्षा
  • आखिरी रविवार: बूथ स्तर पर ‘मन की बात’ कार्यक्रम

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क्या बदलेगा इस नए सिस्टम से?

इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा असर उन नेताओं पर पड़ेगा जो अब तक अपनी सुविधा के अनुसार बैठकों का समय तय करते थे। पहले कई जिलों में बैठकें तब होती थीं, जब प्रभारी या बड़े नेता के पास समय होता था।

अब सभी नेताओं को संगठन के तय कैलेंडर के अनुसार ही काम करना होगा। यह मॉडल क्षेत्रीय संगठन मंत्री अजय जामवाल और प्रदेश प्रभारी महेंद्र सिंह की निगरानी में तैयार किया गया है।

कार्यकर्ताओं को क्या होगा फायदा?

इस बदलाव से पार्टी के कैडर सिस्टम को मजबूती मिलेगी।

  • कार्यकर्ताओं को पहले से जानकारी होगी कि किस दिन कौन सा नेता उनके क्षेत्र में आएगा
  • बैठकों में भागीदारी बढ़ेगी
  • संगठन और जनहित के कामों में तेजी आएगी

डिजिटल ऐप से होगी मॉनिटरिंग

बीजेपी ने इस सिस्टम को लागू करने के लिए डिजिटल तकनीक का भी सहारा लिया है।
अब हर बैठक की पूरी जानकारी संगठन के ऐप पर अपलोड करना अनिवार्य होगा, जिसमें शामिल हैं:

  • फोटो और वीडियो
  • कार्यकर्ताओं की उपस्थिति
  • चर्चा के मुख्य विषय
  • लिए गए फैसले

इससे पार्टी हर स्तर पर गतिविधियों की निगरानी कर सकेगी और जवाबदेही तय होगी।

विपक्ष का रिएक्शन

बीजेपी के इस बदलाव पर कांग्रेस का कहना है कि इस तरह की कार्यप्रणाली का प्रयोग वह पहले से करती आ रही है।

लाडली बहना योजना को लेकर अफवाह फैली, कलेक्टर ऑफिस में उमड़ी महिलाओं की भीड़

कटनी में लाडली बहना योजना को लेकर फैली अफवाहों ने प्रशासन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अज्ञात लोगों द्वारा यह भ्रम फैलाया गया कि योजना के फॉर्म दोबारा भरे जा रहे हैं, जिसके बाद सैकड़ों महिलाएं रोज़ाना कलेक्टर कार्यालय पहुंच रही हैं। हालात ऐसे बन गए कि कलेक्टर ऑफिस में रोज़ महिलाओं की भारी भीड़ जुटने लगी।

प्रशासनिक अधिकारियों ने महिलाओं को समझाने की कोशिश की कि फिलहाल योजना का न तो पोर्टल खुला है और न ही ऑफलाइन फॉर्म भरने के आदेश हैं, लेकिन महिलाएं यह बात मानने को तैयार नहीं हुईं। मजबूरी में प्रशासन को महिलाओं के आवेदन जमा करने पड़े। बीते कुछ दिनों में 5000 से अधिक फॉर्म कलेक्टर कार्यालय में जमा हो चुके हैं।

एक सप्ताह पहले कलेक्टर कार्यालय के बाहर कुछ संगठनों ने प्रदर्शन कर लाडली बहना योजना से वंचित महिलाओं को लाभ देने और ₹3000 मासिक सहायता की मांग उठाई थी। इसी बीच अफवाह फैली कि नाम जोड़ने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसके बाद नगर निगम क्षेत्र और आसपास के गांवों से महिलाएं फॉर्म लेकर कलेक्टर ऑफिस पहुंचने लगीं, जिससे प्रशासनिक कार्य बुरी तरह प्रभावित हुआ।

अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि जमा हुए हजारों फॉर्म आखिर भेजे कहां जाएं। वहीं, इस अफवाह का फायदा उठाकर फोटो कॉपी और फॉर्म संचालक मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। एक पेज का फॉर्म 10 से 20 रुपये में बेचा जा रहा है, जिसमें समग्र आईडी और आधार कार्ड की फोटो भी लगवाई जा रही है। लगातार बढ़ती भीड़ और अव्यवस्था ने प्रशासन की चिंता और बढ़ा दी है।

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